यहां तक कि पीने के लिए भी ग्रामीण इसी डोभा पर निर्भर है और प्रत्येक दिन इतनी दूरी का रास्ता तय कर करते हैं।
मगर सबसे गंभीर बात यह है की मामले को ले कर ग्रामीणों का कहना है कि डोभा का पानी पीने के लिए पूरी तरफ से साफ नही होता है हम अपनी सामर्थ्य के हिसाब से पानी को साफ करते हैं मगर फिर भी पानी पूरी तरह से साफ नही हो पाता है और मजबूरी में हमे प्रदूषित पानी जी पीना पड़ता है और इस प्रदूषित पानी पीने से गांव में अनेक तरह की बीमारियाँ होने की संभवना बना रहती है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव के सड़क मार्ग से नही जुड़ा होने के कारण ग्रामीणों और मरीजों को आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जन प्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय ही याद करते है, उनके कार्यकर्ता गांव में आते है और यह आश्वासन देते है कि अबकी बार वोट दिजिये गांव में चापाकल लग जाएगी और जितने के बाद कोई भी काम नही करते है. ग्रामीण यह भी कहते है कि हमलोगों की सुध लेने के लिय कभी भी इस क्षेत्र के विधायक और सांसद गांव नही आये है. उसके साथ साथ ब्लॉक से भी कोई बड़े अधिकारी नही आये है. ग्रामीणों की अपने जन प्रतिनिधि, प्रशासन और सरकार से मांग है कि गांव के दोनों टोला में दो-दो पाताल बोरिंग किया जाय, संताल टोला में सोलर टंकी दिया जाय और गांव को पक्की सड़क से जोड़ा जाय. इस मौके में लिलमुनी हेम्ब्रोम,सोनती मरांडी,पार्वती मुर्मू,चुड़की सोरेन,रानी मुर्मू,सामुएल टुडू,शिबू टुडू,साकाल टुडू,अमिन किस्कू,होपना टुडू,सिनान किस्कू,बाबुराम टुडू आदि उपस्थित थे.

पहाड़िया आदिमजनजाति








